तेरे नाम कि यादें (Memories of your name)

मेरे हर सासोंमे है तेरा नाम,
नाम के हर शब्द पर है मेरा ध्यान|

हर कदम पर उछल्ति है तेरि यादें,
उन यादों मे दुबि रहति है मेरि नज़रे|

चाहता हुं उन्हि सासोंमे कदम बढाए जाऊं,
तेरे साथ शब्दॊ कों युहिं बुन्ते जाऊं|

पता नहि क्युं सोचता हुं तेरे बारें में,
सोचता हुं बस जीना चाहता हुं तेरे दिल में|

यह दिल तो है हि प्यार का भिकारि,
एक हि सोच मे बलिदान हो जाति है प्यार कि अमीरी|

याद तो बोहोत कर लिये पुरानि बातें,
क्युं न हो जाये और भि नये मुलाकाते|

तेरे एक नाम से झलक उठति है यादें पुरानि,
अब क्युं न हो जाये और भि नयि नयि|

दो किनारें (Two Seashores)

हवा गुंज रही है ऐसे,
गुनगुना रही है कुछ पंक्तियाँ।
फैल रही है ऐसे,
कह रही है कुछ कहानियाँ।

किरणें उड़ रहे हैं ऐसे,
जैसे आखों ने किये हो इशारें।
इशारों पर नाचति आखें,
जैसे समुंदर के दो किनारें।

मत लिखना और नाम इस रेत पर,
खींचति है वह लहरे किनारे।
मिटते नहि यह नाम पल भर,
जब तक किनारे ना भीग जाये पूरे।

छा गये बादल काले काले से,
तेज़ हवा है भीगि भीगि।
बिजली गरजति है तोड के,
लहरें बनती है ऊँचि ऊँचि।

गिरती बूंदों के धार से,
भीगते है किनारे, भीगता है नज़ारा।
एक एक कण भीगि रेत कि,
मांगती है एक हाथ का सहारा।

आसमाँ उजला, किनारे उजले,
उगते सूरज के किरणों से।
चम चमाते दो मोति उगले,
तितली के पंखों जैसे।

हवा गुंज रही है ऐसे,
गुनगुना रही है कुछ नयी पंक्तियाँ।
फैल रही है ऐसे,
कह रही है कुछ नयी कहानियाँ।